जो बँधी थी गाँठ में वो भी गँवाई हाय हाय

जो बँधी थी गाँठ में वो भी गँवाई हाय हाय
आपकी बंदानवाज़ी रहनुमाई हाय हाय

कब से फैलाए खड़े हैं हाथ, अपने राह में
थामते हैं आप ग़ैरों की कलाई हाय हाय

फिर वही कौरव वही पांडव महाभारत वही
छिड़ रही है फिर उसी जैसी लड़ाई हाय हाय

हम कि दोनों जून की रोटी को भी मँहगे हुए
चाभते हैं आप लंदन की मलाई हाय-हाय

अब कोई क़ातिल , कोई मुजरिम न बख़्शा जाएगा
आपने क्या ख़ूब फ़रमाया, बधाई हाय हाय

क़ाग़ज़ों पे पुल बने सड़कें बनीं फिर क्या हुआ
योजनाओं को लगी आने जम्हाई हाय-हाय

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