आँधरे को प्रतिबिम्ब कहा बहिरे को कहा सुर राग की तान

आँधरे को प्रतिबिम्ब कहा बहिरे को कहा सुर राग की तानै ।
आदी को स्वाद कहा कपि को पर नीच कहा उपकारहि मानै ।
भेड़ कहा लै करै बुकवा हरवाह जवाहिर का पहिचानै ।
जानै कहा हिंञरा रति की गति आखर की गति काखर जानै ।

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