इधर पेच है तो मियाँ ,ख़म उधर भी

इधर पेच है तो मियाँ ,ख़म उधर भी[1]
वही ग़म इधर भी वही ग़म उधर भी

है दोनों तरफ दर्दो-ग़म भूख ग़ुरबत
दवा बम इधर भी दवा बम उधर भी

उजाला यहाँ से वहाँ तक परेशाँ
वही तम इधर भी वही तम उधर भी

किसी से भी कोई न छोटा बड़ा है
वही हम इधर भी वही हम उधर भी

ज़रा-सी मुहब्बत ज़रा-सी शराफ़त
वही कम इधर भी वही कम उधर भी

उखड़ता हुआ ‘नूर’ इंसानियत का
वही दम इधर भी वही दम उधर भी

शब्दार्थ:

  1. ↑ हिंदोस्तान-पाकिस्तान हालात पे एक ग़ज़ल

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