कविनामा-3

उससे मिलना
मिलना है एक प्रागैतिहासिक ताड़ के गाछ से

पत्तों की छतरी के नीचे
सुचिक्कण काया
और विचार में डूबे हुए सयाने सरीखी मुद्रा

इसके फल तो आप पान में नहीं खा सकते
न चढ़ा सकते हैं पवित्र पर्वों पर देवपूजा में
मगर इसका रस धरती की शक्ति का प्रतीक है
ग्रहण करते ही
पैर भले टिके रहें धरती पर
सिर जा लगता है आकाश से

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