बरसा बादल

सारे जग का दर्द समेटे बरसा बादल
झूम-झूम और टूट-टूट कर बरसा बादल…
धरती पर फैली हिंसा और पापों को धोने बरसा बादल…
गुस्से या फिर प्यार में पागल…
एक ताल में उमड़-घुमड़ के…
जी भर के बरसा बादल

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