सूखे पेड़ों पे फूल आते हैं

आप जब टकटकी लगाते हैं
सूखे पेड़ों पे फूल आते हैं

कान में बाँसुरी सी बजती है
आप जब नाम से बुलाते हैं

तेरे मिलने का भरोसा जिनको
वो हवाओं में उड़ते जाते हैं

मत सुनाऐं कहानियाँ झूठी
आप के होंठ लरज जाते हैं

तुझे भूले नहीं वो लोग बता
जा के गंगा में क्यूँ नहाते हैं

शमा बेफ़िक्र हो के गलती है
सिर्फ परवाने जलते जाते हैं

साथ ग़म या ख़ुशी में देने को
अश्क अपने ही काम आते हैं

आज के रहनुमाँ हैं प्यासे को
ख़ुद समंदर में छोड़ आते हैं

धुंध आँखों में उतर आती है
याद नीरज वो जब आते हैं

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