हम दर -बदर की ठोकरे खाते चले गये – SALIM RAZA REWA

   ग़ज़ल !!… 
हम दर- बदर की ठोकरे खाते चले गए !
फिर भी तराने प्यार के  गाते चले गए !

कोशिश तो की भंवर ने डुबाने की बारहा!
तूफां से कश्ती फिर भी बचाते चले गए !!

जब ज़िन्दगी का आइना धुधला लगा मुझे !
इमां   की मोतिओ से सजाते चले गए  !

ज़ख्मों पे ज़ख़्म इतना सहे है की दोस्तों !
हंस हंस के सरे ग़म भी भूलाते चले गए !

अपना रहा ख्याल न कुछ होश ही रहा !
आँखों में उसकी हम तो समाते चले गए!

दावाये  हुश्न करते हैं जब देखिये  ज़रा !
क्यूँ मूंह हथेलिओं से छुपाते  चले गए !

हमने नुकुशे आरजू दिल  से निकाल कर !
उसकी रज़ा  की शम्मा  जलाते चले गए !

ये सोच कर “रज़ा” के वो होगा क़रीबतर  !
उसकी वफ़ा की लौ को बढ़ाते चले गए !!

-SALIMRAZA REWA
शायर सलीम “रजा” 9981728122

2 Comments

  1. Aslamraza 24/04/2012
  2. menedi brejes 25/04/2012

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