आम बात

हम हो गए
इतने कुंद कि
पाँच-दस की मौत की ख़बर
हमें अब
द्रवित ही नहीं कर पाती

धीरे-धीरे यह भी
हो जाएगा कि
हमारे निकटतम रिश्तेदार की
मौत भी हमें
द्रवित नहीं कर पाएगी

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