ये दिल है बेक़रार है मदीना बुलाइये [ नात-ए-मुबारक]

ये  दिल     है बेक़रार  है मदीना बुलाइये ।।

है   खुशनुमा  बहार    मदीना    बुलाइये ।।

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नबिओं के तुम नबी हो खुदा के हबीब हो !!
ऐ मेरे   ग़म  गुसार मदीना  बुलाइये !!
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रन्जो अलम में हमने गुज़ारे हैं रात दिन !!
रोते  है   ज़ार-ज़ार मदीना  बुलाइये !!
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करलें  दुआ  कुबूल कि आ जाए न कज़ा !!
सुन लीजिए  पुकार   मदीना   बुलाइये !!
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रब ने ग़ुनाह  बख्से हैं   सद्के में आपके !!
हम भी हैं     ग़ुनह्गार  मदीना बुलाइये !!
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तड़्पे “रज़ा” मदीने  में जाने कि सोच कर !!
मुझको   भी एक बार मदीना    बुलाइये !!
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शायर सलीम “रज़ा” रीवा (म-प्र-)

9981728122

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