शाम आना है सुब्ह जाना है – GAZAL SALIM RAZA REWA

  ग़ज़ल !
शाम आना है सुब्ह जाना है !
दिल सितारों  से क्या लगाना है !

दिल ये कहता है तुम चले आओ !
आज मौसम बड़ा सुहाना है !

उनसे मिलकर ही मैंने जाना है !
ज़िन्दगी का सफ़र  सुहाना है !

प्यार उल्फत वफ़ा मुहब्बत सब !
ये तो जीने का इक बहाना है !

सच कहाँ   होती ख़्वाब  की बातें ! 
ख़्वाब होता मगर सुहाना है !

ग़म फ़क़त है नहीं मेरे संग में !
चद खुशिओं का भी खज़ाना है !

ऐ रज़ा हौसला रहे कायम !
चोट खाकर भी मुस्कुराना है !

 03.12.12

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