छोंड कर दर तेरा हम किधर जाएँगे SALIM RAZA REWA

नात-ए -रसूल
छोंड कर दर तेरा हम किधर जाएँगे !
बिन तेरे तेरी चौखट पे मर   जाएँगे!

जब हबीबे ख़ुदा रह्म फरमाएँगे !
आरज़ूओं के पैमाने भर जाएँगे !

काश मेरा मदीने का   होवे सफ़र !
फूल बनकर गली में बिखर जाएँगे !

दिल में शम्मे वफ़ा होने दो जलवागर !
सामने होंगे वो हम जिधर जाएँगे !

रहमतों की घटाओं के साए में हम !
हर मुसीबत से पल में गुज़र जाएँगे !

उनको होने तो दो मेरे ग़म की ख़बर !
पल में गर्दिश के चेहरे उतर जाएँगे !

आज मौक़ा है तू भी रज़ा मांग ले !
काम बिगड़े तेरे सब संवर जाएगें !

shayar salimraza rewa mp 9981728122

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