इब्तदा तुझी से है इन्तहा तुझी से है- SALIM RAZA REWA

— हम्द–
 इब्तदा तुझी से  है  इन्तहा  तुझी  से है –
 ये निज़ाम दुनिया का  ऐ खुदा तुझी से है –

जिन्नों इंसा  बहरो बर  सब  तेरे करिश्मे  है-
 इस  जहाने फ़ानी में जो बना तुझी से है –

कौन है मेरा दामन भर दे जो मुरादों  से –
तू  हि तो सहारा   है   आसरा तुझी से है –

क्यूं किसी का गुनगाऊँ क्यूं किसी के दर जाऊं- 
तू ही सब को देता है जो मिला तुझी से है –

पल में तू  बना देता ,पल में तू मिटा देता- 
हर लहर में तुग़यानी ज़लज़ला तुझी से है –

तू गिरफ्त में ले ले या कि छोड़ दे मौला –
ज़िन्दगी के लम्हों का फ़ैसला तुझी से है –

क्या बिसात है मेरी बिन करम  तेरे दाता –
शायरी की दुनिया में ये “रज़ा” तुझी से है –

One Response

  1. Saukatraza 14/04/2012

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