मुक्ति का पहला पाठ

करवाचौथ है आज
मीनू साधना भारती विनीता पूनम राधा
सज-धजकर सब
जा रही हैं कहानी सुनने मिसेज कपूर के घर
आधा घंटा हो गया देसना नहीं आई
४०५ वालों की बहू है कुछ ही महीने पहले
आए हैं वे लोग यहाँ
भारती उसे बुलाने गई है
ड्राइंगरूम से ही तकरार की आवाज़ें आ रही हैं

देसना की नोंक-झोंक चलती रहती है
कभी पति से कभी सास से
कभी ननद-देवर से
आज महाभारत है व्रत उपवास को लेकर
देसना कह रही है –
‘मुझे नहीं सुनी कहानी-वहानी नहीं रखना कोई व्रत
आप कहती हैं सभी सुहागिनें इसे रखती हैं
शास्त्रों में भी यही लिखा है
इससे पति की उम्र लंबी होती है

यह कैसा विधान है !
मैं भूखी रहूँगी तो निरंजन ज़्यादा दिनों तक जिएँगे !
यदि ऐसा है तो निरंजन क्यों नहीं रहते मेरे लिए निराहार
क्या मुझे ज़्यादा वर्षों तक नहीं जीना चाहिए ?
शास्त्रों को स्त्रियों की कोई फ़िक्र नहीं

उन्हें लिखा किसने ?
किसने जोड़ा धर्म से – मैं जानना चाहती हूँ
चाहती हूँ जानें सब स्त्रियाँ
पूछें सवाल
मुक्ति का पहला पाठ है पूछना सवाल ।’

साधना मीनू पूनम विनीता राधा
सब सुन रही हैं भारती से देसना की बतकही
मिसेज़ कपूर कहानी सुना रही हैं –
‘सात भाइयों की एक बहन थी……’
पर आज कहीं से हुंकारा नहीं आ रहा

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