मुझको जन्नत न बाग़े इरम चाहिए – SALIM RAZA REWA

नात – ए – रसूल= 
मुझको जन्नत न बाग़े इरम चाहिए=
रब के दिलबर  का नक़्शे क़दम चाहिए=

मेरी  आँखे  तरसती  है दीदार को=
या नबी इक निग़ाहें करम चाहिए =

माँगो दिल से भला क्यूँ न देखा खुदा =
मांगने  के लिए आँख  नम  चाहिए =

मैं भी हूँ उम्मती दर पे बैठा रहूँ =
अब गुलामी मुझे दम बदम चाहिए =

आरज़ू  दिल  में है ख्वाब  में ही कभी=
इक झलक मुझको शाहे उमम चाहिए =

आपके रुए अनवर को तकता  रहूँ =
मौत ऐसी   ख़ुदा की क़सम चाहिए=

जान दे  दूँ  नबी की “रज़ा” के लिए =
या खुदा ऐसा सीने   में दम चाहिए =