ऑंख से न ऑंख, लड जाय इसी कारण से

ऑंख से न ऑंख, लड जाय इसी कारण से,
भिन्नता की भीत, करतार ने लगाई है।
नाक में निवास करने को कुटी ‘शंकर’ की,
छबी ने छपाकर की छाती पै छवाई है॥

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