निभाई यार से यारी, मेरा श’ऊर था वो

निभाई यार से यारी, मेरा श’ऊर था वो
मगर, यूँ लगता है अब तो, मेरा क़ुसूर था वो

चली हवा तो पतंगे सा उड़ गया पल में
बताया लोगों ने मुझको, मेरा ग़ुरूर था वो

वो जो हसीन परी का ख़याल था दिल में
सही कहूं, तो ख़यालात का फ़ितूर था वो

फ़क़ीर दिल ने इरादा बदल दिया, वरना
वो चाँद बाँहों में ही था, न मुझसे दूर था वो

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