कड़ी धूप में बादल के एक टुकड़े के नीचे

कड़ी धूप में बादल के एक टुकड़े के नीचे
मैं उससे पहली बार मिला था
सड़क पर धूप चमक रही थी
धूप में उसके पाँव
मानो समन्दर की लहरों पर चल रहे थे
पत्तों से छन कर आती धूप की तरह
हम एक-दूसरे को देख लेते थे
धूप आसमान की बुलंदियों को छू रही थी
धूप समन्दर की सतह पर बिखरी हुई
और हम दोनों बर्फ़ ढके पहाड़ों की तरह थे
जेठ की धूप
उसके सिर पर बादल का टुकड़ा
किसी आने वाली बारिश की शुरूआत थी

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