सरो के दरख़्त जैसी रौशनी मेरे सामने है

सरो के दरख़्त जैसी रौशनी मेरे सामने है
और पलकों ने झपकना बंद कर दिया है

हवा के तेज़ झोंको ने दरया में लहर पैदा कर दी है
और एक कश्ती अपना लंगर तोड़ मौजों में बह आई है

दिल एक नाचीज़ हिस्से ने सिर उठाया है
और जंगल में एक आग फैलती चली गई है

मैंने अपने आपको तन्हा महसूस किया
और एक साया मेरा हमक़दम हो गया।

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