बदलने का समय

सर्द बारिश में भीग
आँखों में जुगनू लिए
पनाह माँग रहे हैं
कुछ पिल्‍ले

ट्रक से टकरा कर
निचेष्‍ट हुई गाय की
खुली आँखों में है
कन्‍हैया के नाम खून भरी अर्जी

मुँह बँधवा कर
नंदी महाराज से शिकायत
करना चाहता है एक बैल

पीठ छिले गधे के मुँह से निकली है
अस्‍फुट-सी हाय

शेर ने पहली बार
झुक कर कहा है
मुझे बचा लो

भेड़ की पीठ पर हुआ घाव
कह रहा है
देवताओं के लिए अब ऊन ही काफी नहीं

चिडि़या को शिकायत है
शहर में काँटे हैं बहुत

ठीक कहा तुमने
यह रिश्‍तों की परिभाषा
बदलने का समय है।

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