अलि-विलासि-संलाप

कलिका में संदेहित पुष्प

ढूंढा। नहीं पाने पर

उसका प्राण-रस

पी लिया।

–(अलि)

xxx

 

मैंने कल्पित सुगंध

सूंघ कर उसे

बटन-छिद्रित किया।

अब परिमृदित पड़ी है।

–(विलासी)

xxx

 

कैसी अलौकिक यंत्रणा

पाई, तुम दोनों से,

मूर्खों, मुझ पर दया दिखाते!

–(कलिका)

Leave a Reply