धारा-लेखन

सत्तावन की हवा-गाड़ी

लक्ष्य तक पहुँच कर रह गई।

दो-चार वर्षों में

दो मुँह होंगे या दो पूँछ,

एक मुँह और एक पूँछ

नहीं होगी, जैसा आज भी

कुछ-कुछ रह गया है :

धारा रेखन ने मोटर को

यथार्थ हवा-गाड़ी बना दिया है :

हिन्दी का शब्द ज़्यादा ठीक है।

Leave a Reply