एक दिन

विदिशा में रघुनाथसिंह जब तक रहे
हमने ख़ूब आबाद किया उनका घर
वह एक चित्रकार का घर था
उसमें प्रविष्ट होते ही लगता
हम किसी चित्र में प्रविष्ट हो रहे

रघुनाथसिंह के देहावसान के बाद
हम कभी उनके घर नहीं गए

वैसे ही हम नवीन सागर
अशोक माहेश्वरी और विनोद्रंजन उपाध्याय
के घर भी कभी नहीं जाते
उन घरों में जाने के लिए
चाहिए जो जिगर वो मयस्सर कहाँ

एक दिन
हम भी छोड़ देंगेअपनी देह
और तय मानिए कि
अपने घर भी कभी नहीं जाएंगे हम।

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