सुनो

यहाँ से पथ मुड़ जायेगा ।

इधर घूमेगा, फिर उस ओर 
खोजने को पृथ्वी का छोर
बड़ी ही मंज़िल नापेगा।

और कहते हैं-
आखिर में यहीं वापस उड़ आएगा …
उन्हें कहने दो-
जो वे कहें।
चलो, चलते ही हम-तुम रहें।

Leave a Reply