मृदु संगीत कला का

जब-जब मैंने

तेरे मन के अंदर

झाँका है
वहाँ मिला है मुझे

प्यार का पसरा सहज उजास

हर मौसम में खिलनेवाला

टुहटुह लाल पलास

गूंज रहा

कण-कण में मृदु संगीत

कला का है
वहाँ मिली

बच्चों की जिद, कठुआई किलकारी

घुटन, अवसाद, गहन-चिंतन

बदहाली दुश्वारी

खाली पेट

मगर होंठों पर लिखा न

फाका है
मेरी खातिर

रची-बसी हर जगह दुआएँ हैं

श्रम की थकन मिटानेवाली

नर्म हवाएँ हैं

मुझे लगा

यह ही सच्चा अहसास

खुदा का है

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