लुटाने उर्दू अदब की खुशबू तुम्हरी बज्मे सुखन में आये

लुटाने उर्दू अदब की खुशबु हम आज बज्मे सुखन में आये
सजाके लाये हैं हम ग़ज़ल मैं ख्याल जितने ज़ेहन में आये

ख़ुशी भी ग़म भी जफा वफ़ा भी अदावतें भी हैं उल्फतें भी
तमाम जज्बों को लेके दिल मैं तुम्हारी इस अंजुमन में आये
सुकूं की जिसको तलाश है वो मिटा दे नफरत तमाम दिल से,

अना की चादर उतर फेंके मोहब्बतों के चलन में आये

जहाँ भी देखो वहीँ पे ज़ुल्मत जहाँ भी देखो वहीँ पे वहशत,
बचाने फिर से मेरे वतन को कोई तो गाँधी वतन में आये

लपेटे मुझको कफन मैं जिस दम पहुंचे लेकर रकीब मेरे
सदा ये आई के आज तुम भी ख्मोशियों के वतन में आये
खिजाँ का इसमें नहीं है कोई कसूर हसरत यकीन कर लो
उजाड़े गुलशन को खुद ही माली बहार कैसे चमन में आये

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