३८५७. हुआ साजन से प्यार

३८५७. हुआ साजन से प्यार

 

हुआ साजन से प्यार

हिया रहा न हमार

 

जिया बोले धक धक

चले जब भी बयार

 

हमें छोड़ नहीं जाओ

कीनी लाख मनुहार

 

पिया सुनी नहीं एक

रही अबला मैं नार

 

पिया गए परदेस

चिनी बीच में दीवार

 

लौट आओ मेरी जान

कहे दिल बार बार

 

कैसी विपद समाई

करे ख़लिश विचार.

 

महेश चन्द्र गुप्तख़लिश

१ अप्रेल २०१२

 

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