अब ख़ुशी की हदों के पार हूँ मैं

अब ख़ुशी की हदों के पार हूँ मैं
दर्द पिघला है अश्क़ बार हूँ मैं।

गीत कैसे न सुर में ढल जाते
दोस्तो साज़े दिल का तार हूँ मैं।

जिसने पी है तेरी निगाहों से
जो न उतरे वही खुमार हूँ मैं।

जिनको माँगे बिना मिले आँसू
उन्हीं लोगों में अब शुमार हूँ मैं।

जिससे घायल नहीं हुआ कोई
मोम की एक बस कटार हूँ मैं।

Leave a Reply