झूम के बादल छाए हैं

तेरी चाहत , तेरी यादें , तेरी ख़ुशबू लाए हैं ।

बरसों बाद हमारी छत पर झूम के बादल छाए हैं ।

 

सावन का संदेस मिला जब
महक उठी पुरवाई
बूंदों ने छेड़ी है सरगम
रुत ने ली अंगड़ाई

मन के आंगन में यादों के महके महके साए हैं ।

 

जब धानी चूनर लहराई
बाग़ में पड़ गए झूले
मन में फूल खिले कजरी के
तन खाए हिचकोले

बिजुरी के संग रास रचाते मेघ प्यार के आए हैं ।

 

दिन में बारिश की छमछम है
रातों में तनहाई
किसने लूटा चैन दिलों का
किसने नींद चुराई

दिल जलता है लेकिन आँसू आँख भिगोने आए हैं ।

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