साँवरी सुघर नारी महा सुकुमारी सोहै

साँवरी सुघर नारी महा सुकुमारी सोहै ,
मोहै मनमोहन को मदन तरँगनी ।
अनगने गुननि के गरब गहीर मति ,
निपुन सगीँत गीत सरस प्रसँगनी ।
परम प्रवीन बीन मधुर बजावै गावै ,
नेह उपजावै यो रिझावै पति सगँनी ।
चातुर सुभाय बँक भौँहनि दिखाइ देव ,
विँगनि अलिँगन बनावति तिलँगनी ।

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