लाल बिना बिरहाकुल बाल बियोग की ज्वाल भई झुरि झूरी

लाल बिना बिरहाकुल बाल बियोग की ज्वाल भई झुरि झूरी ।
पानी सोँ पौन सोँ प्रेम कहानी सोँ पान ज्योँ प्रानन पोषित हूरी ।
देवजु आज मिलाप की औधि सो बीतत देखि बिसेखि बिसूरी ।
हाथ उठायो उड़ाइबे को उड़ि काग गरे परी चारिक चूरी ।

Leave a Reply