मँद महा मोहक मधुर सुर सुनियत

मँद महा मोहक मधुर सुर सुनियत

धुनियत सीस बँधी बाँसी है री बाँसी है ।
गोकुल की कुलबधू को कुल सम्हरै नही

दो कुल निठारै लाज नासी है री नासी है ।
कहि धौँ सिखावत सिखै धौँ काहि सुधि होय

सुधि बुधि कारे कान्ह डाँसी है री डांसी है ।
देव बृजवासी वा बिसासी की चितौनि वह

गाँसी है री हांसी वह फाँसी है री फाँसी है ।

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