मँजुल मँजरी पँजरी सी ह्वै मनोज के ओज सम्हारत चीरन

मँजुल मँजरी पँजरी सी ह्वै मनोज के ओज सम्हारत चीरन ।
भूँख न प्यास न नीँद परै परी प्रेम अजीरन के जुर जीरन ।
देव घरी पल जाति घुरी अँसुवान के नीर उसास समीरन ।
आहन जाति अहीर अहे तुम्है कान्ह कहा कहौँ काहू की पीरन ।

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