बोयो बस बिरद मैँ बोरी भई बरजत

बोयो बस बिरद मैँ बोरी भई बरजत ,
मेरे बार बार बीर कोई पास बैठो जनि ।
सिगरी सयानी तुम बिगरी अकेली हौँ ही ,
गोहन मैँ छाँड़ो मोसोँ भौँहन अमेठो जनि ।
कुलटा कलँकिनी हौँ कायर कुमति कूर ,
काहू के न काम की निकाम यातें ऎँठो जनि ।
देव तहाँ बैठियत जहाँ बुद्धि बढै हौँ तो ,
बैठी हौँ बिकल कोई मोहि मिलि बैठो जनि

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