बारिध बिरह बड़ी बारिधि की बड़वागि

बारिध बिरह बड़ी बारिधि की बड़वागि

बूड़े बड़े बड़े जहां पारे प्रेम पुलते ।
गरुओ दरप देव जोबन गरब गिरि पयो

गुन टूटि छूटि बुधि नाउ डुलते ।
मेरे मन तेरी भूल मरी हौँ हिये की सूल

कीन्ही तिन तूल तूल अति ही अतुलते ।
भांवते ते भोँड़ी करी मानिनि ते मोड़ी करी

कौड़ी करी हीरा ते कनौड़ी करी कुलते ।

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