बरुनी बघँबर मैँ गूदरी पलक दोऊ

बरुनी बघँबर मैँ गूदरी पलक दोऊ ,
कोए राते बसन भगोहेँ भेष रखियाँ ।

बूड़ी जल ही मैँ दिन जामिनि हूँ जागैँ भौंहैँ ।
धूम सिर छायो बिरहानल बिलखियाँ ।

अँसुआँ फटिक माल लाल डोरे सेल्ही पैन्हि ,
भई हैँ अकेली तजि चेली सँग सखियाँ ।

दीजिये दरस देव कीजिये सँजोगिनि ये ,
जोगिनि ह्वै बैठी हैँ बियोगिनि की अँखियाँ

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