प्यारे तरु नीजन विपिन तरुनी जन ह्वै

प्यारे तरु नीजन विपिन तरुनी जन ह्वै

निकसी निसंक निसि आतुर अतंक मैँ ।
गनै न कलँक मृदु लँकनि मयँकमुखी

पँकज पगन धाई भागि निसि पँक मैँ ।
भूषननि भूलि पैन्हे उलटे दुकूल देव

खुले भुजमूल प्रतिकूल बिधि बँक मैँ ।
चूल्हे चढे छाँड़े उफनात दूध भाँड़े उन

सुत छाँड़े अँक पति छाँड़े परजँक मैँ ।

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