दूलह को देखत हिए

दूलह को देखत हिए मैं हूलफूल है
बनावति दुकूल फूल फूलनि बसति है।
सुनत अनूप रूप नूतन निहारि तनु,
अतनु तुला में तनु तोलति सचति है
लाज भय मूल न, उघारि भुजमूलन,
अकेली है नवेली बाल केली में हँसति है।
पहिरति हरति उतारति धरति देव,
दोऊ कर कंचुकी उकासति कसति है।

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