जबतें कुबर कान्ह रावरी

जबतें कुबर कान्ह रावरी कलानिधान कान परी वाके कहूँ सुजस कहानी सी।
तबहीं तें देव देखौ देवता सी हँसति सी खीझति सी रीझत सी रूसति रिसानी सी।
छोही सी छलि सी छीड़ लीनी सी छकी सी छीन जकी सी टकी सी लगी थकी थहरानी सी।
बीधी सी बँधी सी विष बूड़ी सी विमोहति सी बैठी वह बकति बिलोकति बिकानी सी॥

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