ग्रीषम प्रचंड घाम चंडकर मंडल तें

ग्रीषम प्रचंड घाम चंडकर मंडल तें,
घुमड्यौ है ’देव’ भूमि मंडल अखंड धार ।
भौन तें निकुंज भौन, लहलही डारन ह्वै,
दुलही सिधारी उलही ज्यों लहलही डार ॥
नूतन महल, नूत पल्लवन छवै छवै से,
दलवनि सुखावत पवन उपवन सार ।
तनक-तनक मनि-नूपुरु कनक पाई,
आइ गई झनक-झनक झनकारवार ॥

Leave a Reply