साँई तेरे कारन नैना भये बिरागी

साँई तेरे कारन नैना भये बिरागी।
तेरा सत दरसन चहौं, और न माँगी॥

निसु बासर तेरे नाम की, अंतर धुनि जागी।
फेरत हौं माला मनौं, ऍंसुवनि झरि लागी॥

पलक तजी इस उक्ति तें, मन माया त्यागी।
दृष्टि सदा सत सनमुखी, दरसन अनुरागी॥

मदमाते राते मनौं, दाधै बिरहागी।
मिलु प्रभु ‘दूलनदास के, करु परम सुभागी॥

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