देख अयों मैं तो साँई की सेजरिया

देख अयों मैं तो साँई की सेजरिया।
साँई की सेजरिया सतगुरु की डगरिया॥

सबदहिं ताला सबदहिं कुंजी, सबद की लगी है जँजिरिया।
सबद ओढना सबद बिछौना, सबद की चटक चुनरिया।

सबद सरूपी आप बिराजें, सीस चरन में धरिया।
‘दूलनदास भजु साँई जगजीवन, अगिन से अहँग उजरिया॥

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