कोशिशें – शिशिर मधुकर

मुहब्बत दिल में थी जब तो प्यार आँखों से झरता था
मैंने उल्फत का तब हर पल तेरे संग हंस के बरता था

कोशिशें गर तेरी मुझको सुकूं देने की होती थीं
झोलियां मैं तेरी हद से गुजर खुशियों से भरता था

तुझे एहसास था जब तक मेरा दिल ना दुखे हरगिज
तेरा दिल तोड़ने से मैं भी सुन हरदम ही डरता था

याद कर वो समय तू मेरे बिन बेचैन रहती थी
मेरा हर एक पल तन्हा बड़ा मुश्किल गुजरता था

जब तलक जाम नजरों का मुहब्बत से भरा तूने
नशा मधुकर का देखो चाह कर भी ना उतरता था

शिशिर मधुकर

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 16/04/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/04/2019

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