सभी हैं तुम्हारे सभी हैं हमारे…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

सभी हैं तुम्हारे सभी हैं हमारे मगर फिर भी दुनिया अलग जात होगी…
जुबां खोलना मत कुफर तोलना मत निगाहों में अपनी हरिक बात होगी…

महब्बत का जब ज़िक्र आया जुबां पर सभी के दिलों ने सुनाये तराने….
लकीरें ख़ुशी गम की चहरा बताये कहाँ पर मिली कैसी सौगात होगी….

न जाने कहाँ गुम हुए हैं फ़साने फ़िज़ा में न खुशबू न चहरे नुराने…
सभी की निगाहें बदन ढूंढती हैं कहाँ दिल से दिल की मुलाक़ात होगी…

कभी जान पाओगे जब भी मुझे तुम मिलूँगा तुझे मैं हरिक मोड़ पर ही….
न आँखें मिलेंगी न बातें ही होंगी मगर खूब उल्फत की बरसात होगी….

चलो इश्क़ को आज ‘चन्दर’ सँवारे खुदा की तरह ही इसे भी सजाएं…
ज़िकर-ए-महब्बत हमारा भी होगा जहां में महब्बत की जब बात होगी…
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/सी.एम्.शर्मा (बब्बू)

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 15/04/2019
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/04/2019

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