जंगल के सूखे पत्ते

जंगल के सूखे पत्ते एक कहानी कहते हैं,
अब टहनी-टहनी पर कुछ उदास चेहरे रहते हैं…

बरखा की राह तक-तक के हैं इनकी आँखें सूख चुकी,
अब हरियाली की यादें और बातें भी हैं भूल चुकी..

जिन परिंदों ने कभी बसाया था यहाँ पर डेरा,
वो लौट-लौट कर करते हैं इन सूखे पेड़ों का फेरा…

सूखे से इन पत्तों में, अब भी है थोड़ी सांस कही,
मुरझाये से इन पेड़ों में अब भी थोड़ी आस कहीं..

शायद इस बरस भी, उस बरस सा मेघा छा जाए..
और फिर वर्षा की बूंदों से हमारा आशियाँ हरियाए…

जंगल के सूखे पत्ते एक कहानी कहते हैं,
अब टहनी-टहनी पर कुछ उदास चेहरे रहते हैं…

 

4 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 15/04/2019
    • Garima Mishra Garima Mishra 17/04/2019
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 15/04/2019
    • Garima Mishra Garima Mishra 17/04/2019

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