कशमकश

1 एक बड़ी गलती कर दी
तुझको बनाने वाले ने
थोड़ी तो मिलावट कर देता
जो भरी पड़ी जमाने में

2 गुलाब, गुलशन, जुगनू, चमेली
कुछ रास हमको आता ही नहीं है
लब,उन्स ,खता ,जिद्द हो या हया
तेरा नशा है कि जाता ही नहीं है

3 ठहरे हुए पानी में पत्थर ना डाला करो
हलचल भरी अपनी नजरें सम्भाला करो
नाजुक सी सीरत है दिल और फूलों की
तोड़ने वाली नीयत ना पाला करो

जो ठहर ना पाओ ख्वाबों की खातिर
टूटी कश्तियों को लहरों में ना डाला करो
शदियों भटकती हैं चाहतों की आहें
दिल के बदले में सिर्फ दिल निकाला करो

4 मेरी गलियों से नाता पुराना
तोड़ा नहीं उसने
पलटकर देखने का बहाना
छोड़ा नहीं उसने
बस जानने आते हैं हाल
मरीज का कैसा है
मेरे दर्द पर मरहम लगाना
छोड़ा नहीं उसने
और मैं हूँ कि बस
उस पल का सौदाई
जिसमें फिर लौटकर
सामने आना है उसने

5 यूँ ही वक्त गुजर गया
उसे आजमाने में
और कुछ बीत गया
दिल उसका लुभाने में

नशे से उसके भरपूर थे हम
क्या भरते ,भरे पैमाने में
खो दिया खुद को सजदे में
और क्या खोते उसको पाने में

कहने में मुझको शायद
लगेगी एक जिंदगी
एक अरसा लग गया
उसके कूचे तक आने में

6 एक फूलों सा महकाना उसका
फिर उपर से शर्ममाना उसका
घोल देता है सुर्ख, रस रगों में
कभी राहों में मिल जाना उसका

अल्हड़ पपीहों सी अदा है
हवाओं में आँचल लहराना उसका
जलते दीपों सी है सादगी
आँखों में मयखाना जिसका

शीत लहर की दबी बर्फ है
होले से कदम उठाना उसका
बिखरती है ताजगी दूर तक
हर ओर है जमाना उसका

7 मेरी नादानीयों की ख्वार
इतनी तो सजा मत दे
तेरे बिना भी खुश रहूँ
ऐसी तो दुआ मत दे

8 कुछ चीज़ें दिल से भुलाई नहीं जाती
वो तलब सबसे जताई नहीं जाती
कुछ घाव रहते हैं हर वक्त हरे ही
नासूर पर मरहम लगाई नहीं जाती

9 मोहताज ही रहे दीदारे चश्म यार के
इंतजार ही मिला फक्त बदले प्यार के
वो आये भी तो सिर्फ शिकायतें लेकर
फिर डुबा गये मुझे भंवर से निकालके

10 फिर मेरी खताओंं का गलत इंसाफ कर गया
देनी थी सजा मुझे और वो माफ कर गया

11 तुम मेरे गीत,गजल,राग बन जाओ
मेरी शायरी का हर जवाब बन जाओ
लिख सकूँ ,तुम पर, हर नज्म,अ हशीं
काश तुम ख्वाबों की वो किताब बन जाओ

12 बिन मौसम,कोयलों सा,
दिलों में कूकने वाले
बिन छुऐ भी लूट लेते हैं
लूटने वाले

13 चाहतों के शहर का अजीब
वसूल तो देखिये
कातिलों को दिया दिल
हमारी भूल तो देखिये

14 नादान हैं वो,जो हमपर
नशीले नैयनो से वार करते हैं
हम खुशबुओं के सौदागर हैं
फूलों का व्यापार करते हैं

15 मेरी हिचकियों और सिसकियोंं का
क्या सिला दोगे तुम
बता दो ना साथी
खुद के बदले में क्या लोगे तुम। राकेश कुमार

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