हकीकत – शिशिर मधुकर

बड़ा खूबसूरत है रिश्ता हमारा
उल्फत का जज्बा कभी कम ना होगा
जहाँ रोशनी फैलती हो रवि से
नफरत का हरगिज वहाँ तम ना होगा

जो रिश्ते बनाते हैं मतलब की खातिर
अक्सर वो लम्बे निभते नहीं हैं
जो सींचा ना हो प्यार से ही मुसलसल
सहने को चोटें वहाँ दम ना होगा

तुम्हें देखनी है जो अपनी हकीकत
आँखों के कोनों में तुम उसकी झांकों
अगर झूठ ही झूठ पसरा है मन में
असुओं से हरगिज वो नम ना होगा

ये दौलत जहाँ की अगर ना मिले तो
खुशियां तो फिर भी आती रहेंगी
अगर साथ में है मुहब्बत तुम्हारी
किसी चीज का भी तुम्हें गम ना होगा

अगर दिल दुखाया है तुमने किसी का
ज़रा हाल भी उसका आ के तो ले लो
तूफां जो उसके दिल में उठेगा
मधुकर वो तुम बिन रहा थम ना होगा

शिशिर मधुकर

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