मुसीबत – शिशिर मधुकर

आज आते ही लो फिर से तुम्हारा हाल लिया
प्रेम का दीप हवाओं में मैंने बाल लिया

अब तो जीते जी ना बदलेगी ये आदत मेरी
दिल लगाने की मुसीबत को मैंने पाल लिया

प्रीत ज़िंदा रहे कर्तव्य भी ना गौण पड़े
मुश्किलातों के लिए खुद को भी मैंने ढाल लिया

जुदा करूँ भी तो कैसे करूँ तुम्हें खुद से
अपनी सांसों में तेरी खुशबू को मैंने डाल लिया

ए जमाने की नजर अब ना मुझको खौफ दिखा
मैंने भी देख मधुकर हर यहाँ भूचाल लिया

शिशिर मधुकर

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