क्या तुम..

मिल गयी तुम इत्तेफ़ाक़ से एक दिन
एक दिन तुम बिछड़ भी जाओगी
रह जाएंगी बस तुम्हारी यादें मेरे पास
तुम्हारी यादों में ही सही
क्या तुम्हारे भीतर भी मैं रह पाऊंगा
सफर में हमराह चला था तुम्हारे साथ
क्या तुम वाकई मुझे भूला कर
आगे बढ़ती जाओगी
अपनी नई दुनिया बसा कर
मेरी दोस्ती का घरौंदा उजाड़ जाओगी
अगली बार जब तुम दिख जाओगी तो
क्या तुम मुझे पहचान पाओगी
या भीड़ में मुझे भी अजनबी कर जाओगी
तुम्हे याद कर-कर के
पलके मेरी हमेशा भींगी रहेंगी
क्या तुम भी मेरे लिए थोड़ा सा आँसू बहाओगी–अभिषेक राजहंस

2 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 09/04/2019
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/04/2019

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