आकाश – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

भग देखो आकाश में
एक दिन एक रात में।
दोनों का काम उजाला
बड़ा यह है मतवाला।
एक राजा है दिन का
एक चाँदनी रात की ।
एक तपता है दिनभर
एक शीतल है रातभर।
समय चक्र घुमाता है
रास्ता यही दिखाता है।
ग्रह – तारे कितने नभ में
दो ही भा जाते सब में।
मौसम का रंग बदलता
युगों – युगों से ये चलता।
इक आता तो इक जाता
ये अपने भाग्य विधाता।
दुनिया है गाती जिनकी
पुजा की जाती उनकी।
इससे है चलती प्रकृति
यही है विधना की रीति।
सबको यह जीवन देता
बदले नहीं कुछ लेता।

भग – चाँद, सूरज

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