ग़ज़ल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

दिल पर एतबार अब होता नहीं मुझको
किसी से भी प्यार अब होता नहीं मुझको।

जालिमों ने हमें लूट लिया है इस कदर
किसी का इंतजार अब होता नही मुझको।

भरोसे में जिंदगी हमनें कर दी कुरवान
धूंट कड़वी पार अब होता नहीं मुझको।

दर्द बहुत ही सह लिए इस दिल में मैंनें
मरहम का दरकार अब होता नहीं मुझको।

कभी घुमते थे हम साया बनकर उनका
वो सपना साकार अब होता नहीं मुझको।

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